सरिता वर्मा (भूतपूर्व प्रिसिंपल स्ट्रैला से बातचीत पर आधारित )
कुछ पेरेंट्स को लगता है कि उनका बच्चा तो स्कूल में बहुत अच्छा कर रहा है, तो उन्हें पीटीएम में जाने की क्या जरूरत है? लेकिन आपके बच्चे के विकास से जुड़ी कुछ बातें तो स्कूल जाने पर ही पता चलती है, इसलिए आपको अपने बच्चे की हर प्रोग्रेस जानने के लिए पीटीएम में जाना चाहिए। दरअसल, अभिभावक और टीचर्स के आपस में बातचीत का मुख्य मकसद बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना होता है। उसके व्यक्तित्व से जुड़ी बातों को एक-दूसरे से शेयर करना और उसकी कमियों को जानना भी है।

शैक्ष्ाणिक स्तर पर बच्चे में जो कुछ भी कमियां हैं, उसे दोनों तरफ से प्रयास करके, दूर करने की कोशिश करना भी है। इतने अच्छे उद्देश्य होने के बावजूद पीटीएम को लेकर टीचर्स और पेरेंट्स कुछ खास उत्साहित नहीं होते है। इसे हम महज औपचारिकता भर मान लेते हैं। जिस तरह के माहौल में आज के बच्चे जी रहे हैं, उसको ध्यान में रखकर जरूरी हो गया है कि पेरेंट्स स्कूल टीचर से मिलकर अपने बच्चे के बारे सब कुछ जानें।
-बच्चों की बहुत अधिक कमियां या बात-बात पर आलोचना अभिभावकों को मीटिंग में आने से रोकती है, इसलिए टीचर सबसे पहले बच्चों के साथ समान व्यवहार रखें। तभी बच्चों में आत्मविश्वास बना रहेगा।
-किसी और के द्वारा अपने बच्चों की कमी को अभिभावक सहन नहीं कर पाते हैं, इसलिए मीटिंग खत्म होने के बाद टीचर को पेरेंट्स से बात करनी चाहिए और दोनों को मिलकर इस समस्या का हल खोजना चाहिए।
-शिक्षा विशेषज्ञ होने के कारण टीचर से यह अपेक्षा की जाती है कि वे बच्चे की प्रगति और विकास के लिए सही सलाह देंगे। इस विश्वास को बनाए रखना जरूरी है। हालांकि पीटीएम में टीचर्स को एक दिन में 40-50 बच्चों के अभिभावकों से व्यक्तिगत तौर पर बात करनी पड़ती है। ऐसे में टीचर जल्दी-जल्दी इसे निपटाने का प्रयास करती हैं। इसमें परिवर्तन करने की जरूरत है। पेरेंट्स को छोटे-छोटे समूह में अलग-अलग दिन बुलाना चाहिए। बच्चों के प्रदर्शन और उनके ग्रेड के आधार पर यह समूह बनाया जाना चाहिए।
-बच्चे के विकास के लिए पीटीएम बहुत ही महत्वपूर्ण है, इसलिए पेरेंट्स को जरूर जाना चाहिए और टीचर को भी बच्चों के माता-पिता से नम्रता एवं धैर्य से हर प्रश्न का उत्तर देना चाहिए। बच्चों की अच्छाई और बुराई दोनों से अवगत करना चाहिए।
-टीचर के लिए यह भी जरूरी है कि वे पेरेंट्स की बात को ध्यान से सुनें। तब कोई प्रतिक्रिया दें, क्योंकि हर समस्या का कोई-न-कोई समाधान होता है।
अगर आपका बच्चा स्कूल में अच्छा नहीं कर पा रहा है, तो इस पर टीचर से खुलकर बात करें और उसका समाधान मांगें। अगर आपका बच्चा क्लास में दूसरे बच्चों और टीचर से घुल-मिलकर बात करता है या फिर वह चुप-चुप किसी कोने में बैठा रहता है, तो इन सब जरूरी सवालों का जवाब आपको इसी पेरेंट-टीचर मीटिंग में ही मिलेंगे। टीचर से कोई शिकायत है, तो आप इसे यहीं पर सुलझा सकती हैं।
कुछ बच्चे लिखने से ज्यादा सिर्फ किताबें पढ़ना पसंद करते हैं, वहीं कुछ सिर्फ चीजों को अच्छे से याद रखते हैं। और टीचर अपने स्टूडेंट के बारे में सब जानती हैं। उनसे इस बात की जानकारी लें कि
बच्चे की कमी क्या है और इसे किस तरह से दूर किया जाए?
पीटीएम में आपकी अपने बच्चे के दोस्तों के पेरेंट्स से भी मुलाकात होती है। इससे आप उन पेरेंट्स से भी पेरेंटिंग के कुछ अनमोल सुझाव ले सकती हैं। समय-समय पर बच्चों के साथ बैठकर इत्मीनान से पता करें कि उन्हें किसी प्रकार की कोई परेशानी तो नहीं है। स्कूल से संबंधित अगर कोई समस्या है, तो इस पर टीचर से अवश्य बात करें। टीचर से इस बात के बारे में भी जानें कि आपका बच्चा अनुशासित है या नहीं। वह आपको बच्चे के साथ अनुशासित रहने और उसको अनुशासन सिखाने में आपको जरूर कुछ टिप्स देंगे।
